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بسم الله الرحمن الرحیم..........---توجه توجه بخش بانک سخنرانی مهدویت در تاریخ 11تیر افتتاح شد.با کمک خدا ویاری امام زمان بخش فرهنگنامه مهدویت وسروده های مذهبی افتتاح شد و همچنین زبان های این وبلاگ از 20 زبان به 26 زبان گسترش پیداکرد-----بخش گالری تصاویر درحال ساخت می باشد
    बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इस्लामी रिवायतों की बिना पर क़ुरआने मजीद की बे शुमार आयतें अहले बैत अलैहिम अस्सलाम के फ़ज़ाइल व मनाक़िब के गिर्द घूम रही हैं और इन्हीं मासूम हस्तियों के किरदार के मुख़्तलिफ़ पहलुओं की तरफ़ इशारा कर रही हैं। बल्कि कुछ रिवायतों की बिना पर पूरे कुरआन का ताल्लुक़ इनके मनाक़िब, इनके मुख़ालिफ़ों

 

نويسنده:محمدرضا ربیعی نژاد |  دوشنبه چهاردهم مرداد 1387 ادامه مطلب
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    इमाम महदी नुबुव्वत के आईने में:-

इमाम महदी नुबुव्वत के आईने में:-

अल्लामा तबरसी बहवाल -ए- हज़रात मासूमीन अलैहिस्सलाम तहरीर फ़रमाते है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम में बहुत से अम्बिया के हालात व कैफ़ियात नज़र आते हैं और जिन मुखतलिफ़ वाक़ियात से अम्बिया को दो चार होना पड़ा,

 

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    इमाम महदी अलैहिस्सलाम का वुजूद, ग़ैबत, और ज़हूर क़ुरआने मजीद की रौशनी में :

इमाम महदी अलैहिस्सलाम का वुजूद, ग़ैबत, और ज़हूर क़ुरआने मजीद की रौशनी में :

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के वुजूद, ग़ैबत, तूले उम्र और आपके ज़हूर के बाद तमाम अदयान के एक हो जाने से मुताअल्लिक़ 94 आयतें क़ुरआने मजीद में मौजूद हैं। जिनमें से अकसर को दोनों फ़रीक़ ने तसलीम किया है। इसी तरह बेशुमार ख़ुसूसी अहादीस भी हैं। तफ़सील के लिए मुलाहेज़ा हो ग़ायतुल मक़सूद व ग़ायतुल मराम अल्लामा हाशिम बहरानी व यानाबि उल मवद्दाता।

 

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    इमाम महदी अलैहिस्सलाम और हज्जे काबा

इमाम महदी अलैहिस्सलाम और हज्जे काबा

यह मुसल्लेमात में से है कि हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम हर साल काबे के हज्ज के लिए मक्का मोअज़्ज़मा उसी तरह तशरीफ़ ले जाते है जिस तरह हज़रत ख़िज़्र व इलयास अलैहिस्सलाम जाते हैं।

(सिराज अल कुलूब सफ़ा 77)

अली अहमद कूफ़ी का ब्यान है

 

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    आपके अलक़ाब

आपके अलक़ाब

आपके अलक़ाब महदी, हुज्जतुल्लाह, ख़लफ़ुस्सालेह, साहिबुल अस्र व साहिबुल अम्र, साहिबुज़्ज़मान, अलक़ाइम, अलबाक़ी और अलमुन्तज़र हैं। मुलाहेज़ा हो तज़केर -ए- ख़वासुल उम्मत सफ़ा 204, रौज़तुश शोहदा सफ़ा 439 कशफ़ुल ग़ुम्मा सफ़ा 131 सवाइक़े मुहर्रिक़ा सफ़ा 124 मतालेबुल सुवल सफ़ा

 

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    आपका इस्मे गिरामी

आपका इस्मे गिरामी

आप का नामे नामी व इस्मे गिरामी ?मुहम्मद? ?और मशहूर लक़ब ?महदी? है। उलमा का कहना है कि आपका नाम ज़बान पर जारी करने की मुमानिअत है।

अल्लामा मजलिसी इसकी ताईद करते हुए फ़रमाते है कि ?हिकमते आन मख़्फ़ी अस्त? यानी इसकी वजह पोशीदा और ग़ैर मालूम है।

?(जिला उल अयून)

उलमा का बयान है कि आपका नाम ख़ुद हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने रखा

 

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